अमेरिकी टैरिफ

अमेरिकी टैरिफ से भारतीय रत्न और आभूषण निर्यात पर संकट: उद्योग पर प्रभाव और संभावित समाधान

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अमेरिकी टैरिफ
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अमेरिका द्वारा भारतीय रत्न और आभूषण निर्यात पर 26% टैरिफ लगाने के निर्णय से भारत का $32 बिलियन का यह उद्योग गंभीर संकट में है। अमेरिका, जो भारतीय रत्न और आभूषण निर्यात का लगभग 30% ($10 बिलियन) खरीदता है, इस टैरिफ के कारण भारतीय निर्यातकों के लिए कम आकर्षक बाजार बन सकता है|

उद्योग पर प्रभाव:

  • निर्यात में गिरावट: इस टैरिफ के परिणामस्वरूप, भारतीय रत्न और आभूषण निर्यात में भारी गिरावट की संभावना है। उद्योग पहले से ही चीन से कमजोर मांग के कारण प्रभावित था, जिससे 2023-24 वित्तीय वर्ष में निर्यात में 14.5% की कमी आई थी।
  • रुपये की कमजोरी: अमेरिकी टैरिफ के कारण भारतीय रुपये में कमजोरी देखी गई है, जिससे मुद्रा बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
  • रोजगार पर प्रभाव: उद्योग में लाखों लोग कार्यरत हैं, और निर्यात में गिरावट से रोजगार के अवसरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।​

संभावित समाधान और उद्योग की प्रतिक्रिया:

  • टैरिफ में कमी की अपील: रत्न और आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) ने सरकार से अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए आयात शुल्क में कटौती करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कीमती और अर्ध-कीमती पत्थरों पर 5% से 2.5% और सोने के आभूषणों पर 20% से 12% तक शुल्क कम करने का सुझाव दिया है। ​
  • नए बाजारों की खोज: उद्योग के नेता अन्य बाजारों जैसे मध्य पूर्व और यूरोप में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की योजना बना रहे हैं ताकि अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को संतुलित किया जा सके। ​
  • व्यापार वार्ता: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की वार्ता चल रही है, और उद्योग को उम्मीद है कि निकट भविष्य में एक द्विपक्षीय समझौता हो सकता है, जिससे टैरिफ के प्रभाव को कम किया जा सके।

निष्कर्ष:

अमेरिकी टैरिफ के कारण भारतीय रत्न और आभूषण उद्योग गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। हालांकि, सरकार और उद्योग के संयुक्त प्रयासों से इन चुनौतियों का समाधान खोजा जा सकता है। आयात शुल्क में संभावित कटौती, नए बाजारों की खोज, और व्यापार वार्ताओं के माध्यम से, उद्योग इस संकट से उबरने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।

Sources: Reuters

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